बेबी गुप्ता : रेल मंत्री के तौर पर मंगलवार को शपथ लेने वाले दिनेश त्रिवेदी ने रेल सुरक्षा को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखा है और कालका मेल हादसे में मारे गये प्रत्येक यात्री के एक परिजन को नौकरी देने की घोषणा की है। वह अपनी पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी के निर्देशों पर सीधे दुर्घटना स्थल के लिए रवाना हो गये।
त्रिवेदी ने शपथ ग्रहण करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि हालात बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। दुर्घटना हुई है सभी जानते हैं। इसलिए मैं राष्ट्रपति भवन से रेल भवन या अपने घर नहीं जा रहा।
उन्होंने कहा कि मैं सीधे दुर्घटना स्थल पर जा रहा हूं। मेरी नेता ममता बनर्जी ने भी मुझे निर्देश दिया है कि यह पहला काम है जो हमें करना है। उत्तर प्रदेश में फतेहपुर के पास रविवार को हुए ट्रेन हादसे में 69 लोगों की मौत हो चुकी है।
त्रिवेदी ने कहा कि प्रत्येक मृतक के एक परिजन को नौकरी दी जाएगी।
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उत्तर प्रदेश को दलाल चला रहे है: राहुल
खूबसूरत प्रीति जिंटा बनेंगी खतरनाक ‘गैंगस्टर’!
इस समय पर्दे पर कम और अपनी आईपीएल क्रिकेट टीम की वजह से मैदान पर ज्यादा नजर आनेवालीं अभिनेत्री प्रीति जिंटा अब ‘गैंगस्टर’ बन सकती हैं।
दरअसल फिल्म ‘हासिल’ के निर्देशक तिग्मांशु धूलिया की फिल्म ‘जय रामजी’ में वे पहली बार एक गैंगस्टर की भूमिका निभा सकती हैं।
सुनने में आया है कि निर्देशक तिग्मांशु फिल्म में प्रीति को ही लेना चाहते हैं, जिसके लिए प्रीति ने भी हामी भर दी है। हालांकि अभी औपचारिक तौर पर प्रीति को साइन नहीं किया गया है।
किस्मत के सितारों को मानती हैं प्रीति जिंटा!
दरअसल, इन दिनों वे आईपीएल में व्यस्त हैं। यह फिल्म पूर्वी उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि पर गैंगस्टर आधारित है। प्रीति इसी गैंग का हिस्सा होंगी।
इस फिल्म की शूटिंग जुलाई में शुरू होगी तथा दिसंबर-जनवरी तक पूरी हो जाएगी।
फिल्म में अर्जुन रामपाल, इरफान खान और रणदीप हुड्डा भी हैं। फिल्म का लेखन धूलिया ने किया है और साथ ही वे पांचाली चक्रवर्ती के साथ फिल्म के सहायक निर्माता भी हैं।
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ब्लॉग से टैक्स्ट चोरी के लिए ताला
मनोज जैसवाल-ताला तोड़कर चोरी। रोजाना इसी तरह की खबरें आप अखबारों में तो पढ़ते ही होंगे। क्या चोरों के लिए कोई भी ताला तोड़ना मुश्किल है? नहीं न.. तो क्या आप घर में ताला लगाना ही छोड़ देंगे। यह सोचकर कि चोर के सामने ताला क्या औकात रखता है। नहीं जी, मुझे पता है कि आप ताला तो फिर भी लगाएंगे ही। कम से कम घर चोरों से न सही, उचक्कों से तो बच ही जाएगा।
पिछली पोस्ट में मैंने ब्लॉग से टैक्स्ट चोरी के लिए जो ताला बताया था, कुछ ब्लॉगर साथियों ने उसे आसानी से तोड़ दिया और टैक्स्ट मुझे भेज दिया। ऐसे सभी साथियों को धन्यवाद। मैं यह बता दूं कि मैंने ताला तोड़ने के लिए किसी को कोई चुनौती नहीं दी थी। और चुनौती तो सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली वेबसाइटें भी नहीं दे सकती। वरना उनका चुटकियों में काम-तमाम तय है।
पिछली पोस्ट में बताया गया ताला इंटरनेट एक्सप्लोरर पर तो ठीक से काम कर रहा था, लेकिन फायरफॉक्स पर यह लागू नहीं था (जिन पाठकों ने मुझे इसकी जानकारी दी थी, उनका आभार)। इसी वजह से मैंने एक और ताला बनाया है। यह पिछले ताले के मुकाबले थोड़ा मजबूत है और फायरफॉक्स पर भी आमतौर पर काम कर रहा है। मैं यहां साफ कर देना चाहूंगा कि यह ताला टैक्स्ट को प्रोफेशनल चोरों से तो नहीं बचा सकता, लेकिन उचक्कों से आपके ब्लॉग को जरूर बचा लेगा। मैं यह दावा कतई नहीं कर रहा हूं कि यह ताला लगाने के बाद आप टैक्स्ट को कॉपी नहीं कर सकते। पर विश्वास जरूर रखता हूं कि यह आसानी से कॉपी नहीं होगा। (हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर कोड कॉपी करने की सुविधा के चलते यह ताला नहीं लगाया गया है)
आइए सीखते हैं इस नए ताले को लगाने का तरीका-
(पिछली पोस्ट से ताला लगा चुके साथियों से अपील करूंगा कि वे उसके स्थान पर यह ताला काम में लें, क्योंकि यह थोड़ा मजबूत है।)
1. अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड पर जाएं।
2. जिस ब्लॉग पर ताला लगाना है, उसके Layout में जाएं।
3. साइडबार में Add a Gadget पर क्लिक करें।

4. HTML/JavaScript को ब्लॉग में जोड़ने का ऑप्शन चुनें।

5. टाइटल की जगह खाली छोड़ दें और कंटेंट में नीचे लिंक में दिया गया जावास्क्रिप्ट कोड पेस्ट कर दें।
कोड के लिए यहां क्लिक करें
तरीका इस इमेज में दिखाया गया है-

6. सेव करते ही आपके ब्लॉग पर इस तरह का ताला नजर आने लगेगा।

आपके ब्लॉग की साइडबार में अगर यह नजर आ रहा है तो अब आपके ब्लॉग का टैक्स्ट सुरक्षित है।
पिछली पोस्ट में मैंने ब्लॉग से टैक्स्ट चोरी के लिए जो ताला बताया था, कुछ ब्लॉगर साथियों ने उसे आसानी से तोड़ दिया और टैक्स्ट मुझे भेज दिया। ऐसे सभी साथियों को धन्यवाद। मैं यह बता दूं कि मैंने ताला तोड़ने के लिए किसी को कोई चुनौती नहीं दी थी। और चुनौती तो सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली वेबसाइटें भी नहीं दे सकती। वरना उनका चुटकियों में काम-तमाम तय है।
पिछली पोस्ट में बताया गया ताला इंटरनेट एक्सप्लोरर पर तो ठीक से काम कर रहा था, लेकिन फायरफॉक्स पर यह लागू नहीं था (जिन पाठकों ने मुझे इसकी जानकारी दी थी, उनका आभार)। इसी वजह से मैंने एक और ताला बनाया है। यह पिछले ताले के मुकाबले थोड़ा मजबूत है और फायरफॉक्स पर भी आमतौर पर काम कर रहा है। मैं यहां साफ कर देना चाहूंगा कि यह ताला टैक्स्ट को प्रोफेशनल चोरों से तो नहीं बचा सकता, लेकिन उचक्कों से आपके ब्लॉग को जरूर बचा लेगा। मैं यह दावा कतई नहीं कर रहा हूं कि यह ताला लगाने के बाद आप टैक्स्ट को कॉपी नहीं कर सकते। पर विश्वास जरूर रखता हूं कि यह आसानी से कॉपी नहीं होगा। (हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर कोड कॉपी करने की सुविधा के चलते यह ताला नहीं लगाया गया है)
आइए सीखते हैं इस नए ताले को लगाने का तरीका-
(पिछली पोस्ट से ताला लगा चुके साथियों से अपील करूंगा कि वे उसके स्थान पर यह ताला काम में लें, क्योंकि यह थोड़ा मजबूत है।)
1. अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड पर जाएं।
2. जिस ब्लॉग पर ताला लगाना है, उसके Layout में जाएं।
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प्रधानमंत्री द्वारा संसद में अपनी गलती मानते हुए क्षमायाचना करना एक स्वस्थ कदम
बेबी जैसवाल-सीवीसी पद पर पीजे थॉमस की नियुक्ति को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा संसद में अपनी गलती मानते हुए क्षमायाचना करना एक स्वस्थ कदम है। लोकसभा में नेता विपक्ष सुषमा स्वराज ने भी उनकी इस पहल को सही ढंग से लिया और कहा कि इस मसले को वे अब और आगे नहीं बढ़ाना चाहतीं। लेकिन बाकी देश डॉ. मनमोहन सिंह की क्षमायाचना को किस तरह लेगा, यह अभी तय नहीं है। लोगों में सरकार और प्रधानमंत्री को लेकर एक धारणा बन गई है कि वे अपनी गलतियों का अंत-अंत तक बचाव करते हैं। फिर पूरी तरह घिर जाने के बाद ही या तो उनके खिलाफ कोई कदम उठाते हैं, या किसी और ढंग से मामले पर मिट्टी डालने की कोशिश करते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री को आने वाले दिनों में यह साबित करना होगा कि उनकी क्षमायाचना किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं है और इसको लेकर वे वाकई गंभीर हैं।
इसके लिए उन्हें कुछ बहुत ज्यादा करने की जरूरत नहीं है। पिछले दो-तीन महीनों में सरकार ने भ्रष्ट मंत्रियों और नौकरशाहों के खिलाफ जो पहलकदमियां ली हैं, उन्हें ही वह अपने बचे हुए तीन साल तीन महीनों में भी जारी रखे तो यह न सिर्फ उसकी छवि के लिए अच्छा होगा, बल्कि भ्रष्टाचार का कैंसर सत्ता के सभी पायदानों तक फैल जाने की खबरों से व्यवस्था के प्रति जो लोगों का आत्मविश्वास बुरी तरह हिल गया है, वह भी कुछ हद तक ठिकाने पर आ जाएगा।
पिछले कुछ ही महीनों में इस देश ने क्या-क्या दिन देख लिए हैं! आसमानी आंकड़ों वाले स्पेक्ट्रम घोटाले में एक पूर्व केंद्रीय मंत्री तिहाड़ जेल में पड़ा है। कॉमनवेल्थ खेलों के लिए जिम्मेदार दो आला अफसर भी वहां उसका साथ दे रहे हैं। उनकी सरपरस्ती करने वाला केंद्रीय मंत्री के स्तर का एक अन्य नेता कभी भी उनकी सोहबत में पहुंच सकता है। शहीद सैनिकों के नाम पर बनी एक सोसाइटी के घोटाले में सत्तापक्ष से जुड़े एक मुख्यमंत्री को अपने पॉलिटिकल करियर के बीच में ही रिटायर होना पड़ा है, जबकि विपक्ष से जुड़ा लगभग उसी स्तर के भूमि घोटाले में शामिल एक अन्य मुख्यमंत्री आज भी अपने पद पर कायम है।
पूर्व थल सेनाध्यक्ष और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश तक को जमीन, फ्लैट और दूसरे घोटालों के आरोपों में घिरा हुआ पाया गया है। भ्रष्टाचार पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार देश के सबसे ऊंचे पद पर बैठे अफसर को खुद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हटना पड़ा है। हालांकि पद छोड़ने के लिए वह आज भी तैयार नहीं है, फैसले की समीक्षा के लिए अर्जी लगाने की बात कर रहा है। यह काजल की कोठरी क्या प्रधानमंत्री की क्षमायाचना के बाद साफ-सुथरी नजर आने लगेगी?
करप्शन की खबरों से बुरी तरह पक गए लोगों को राहत अब ठोस कार्रवाई से ही मिल सकती है और इस कोशिश में अगर किसी को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ती है, तो उसे इज्जत से याद किया जाएगा।
राजा को सीबीआई ने किया गिरफ्तार
प्रेषक-मनोज जैसवाल-पूर्व संचार मंत्री ए राजा तथा दो अधिकारियों को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया। इन लोगों पर 2जी मोबाइल फोन सेवाओं के लिए लाइसेंस व स्पेक्ट्रम आवंटन में धांधली का आरोप है।
राजा और दो अधिकारियों को ऐसे समय गिरफ्तार किया गया है, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अगले सप्ताह उच्चतम न्यायालय में मामले की जांच की प्रगति के बारे में अंतिम रिपोर्ट देने वाली है।
सीबीआई के संक्षिप्त बयान के मुताबिक, आशय पत्र और यूनिफाइड एक्ससे सर्विसेज लाइसेंस (एकीकृत सेवा लाइसेंस) आवंटन मामले की जांच के दौरान अब तक जो भी तथ्य सामने आए हैं, उसके आधार पर तत्कालीन दूरसंचार मंत्री, तत्कालीन सचिव और मंत्री के तत्कालीन निजी सचिव को गिरफ्तार किया गया है।
सीबीआई ने इस बारे में दूरसंचार विभाग अज्ञात अधिकारियों, कुछ लोगों तथा फमो के खिलाफ कतिपय कंपनियों को लाभ देने के लिए पद का दुरुपयोग तथा साजिश के आरोप में मामला दर्ज किया था।
47 वर्षीय राजा के मंत्री पद से इस्तीफा देने के दो महीने बाद गिरफ्तार किया गया है। वह कांग्रेस के प्रमुख सहयोगी द्रमुक के दलित चेहरे के रूप में चर्चित हैं।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में 2007-08 में स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर सरकार को हुए 1.76 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान की बात के खुलासे के बाद संसद में हुए हंगामे और सरकार पर बने दबाव के बाद राजा को इस्तीफा देना पड़ा था।
इस मामले के कारण संसद के शीतकालीन सत्र में कोई कामकाज नहीं हो सका। विपक्षी दल संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच की मांग पर अड़े हैं। जब तक मामले का हल नहीं हो जाता, आगामी बजट सत्र को सुचारू तरीके से चलाने में भी सरकार को कठिनाई आ सकती है।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि राजा को गिरफ्तार करने का फैसला उनसे पूछताछ के आधार पर किया गया। पूछताछ में पूर्व मंत्री के 2007 और 2008 के बीच कुछ वित्तीय सौदों के बारे में पता चला है।
पेशे से वकील और पांच बार सांसद चुने गए राजा को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में 2007-08 में स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर सरकार को हुए 1.76 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान की बात के खुलासे के बाद संसद में हुए हंगामे और सरकार पर बने दबाव के बाद राजा को इस्तीफा देना पड़ा था।
तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि के बीच दोनों दलों के गठबंधन को मजबूत करने के लिए हुई बातचीत के दो दिन बाद यह गिरफ्तारी हुई है।
दोनों दलों ने राजा की गिरफ्तार से राजनीतिग गठबंधन पर किसी प्रकार का असर पड़ने की बात से इनकार किया है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और राजनीतिक गठबंधन से इसका कुछ भी लेना-देना नहीं है।
बहरहाल, विपक्षी दल सीबीआई के इस कदम से खुश नहीं हैं। भाजपा का कहना है कि, बहुत कम और देर से की गई कार्रवाई है। भाजपा के नेतृत्व वाला राजग घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग पर अड़ा है।
द्रमुक की प्रतिद्वंद्वी अन्नाद्रमुक ने एक कदम आगे बढ़ते हुए कपंनियों के लिए जनसंपर्क काम करने वाली नीरा राडिया और उसके साथ बातचीत करने वाले करुणानिधि के परिजनों को गिरफ्तार करने की मांग की है।
सीबीआई ने अक्टूबर 2009 में दूरसंचार विभाग के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था तथा मंत्रालय में जांच की थी, लेकिन राजा के इस्तीफे के बाद ही उन पर जांच एजेंसी का फोकस हुआ। इससे पूर्व सीबीआई राजा से तीन बार पूछताछ कर चुकी थी।
अपनी प्राथमिकी में सीबीआई ने स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में 22000 करोड़ रुपये के नुकसान की बात कही है। जांच एजेंसी ने केंद्रीय सतर्कता आयोग से प्राप्त तथ्यों के आधार पर इतने नुकसान का जिक्र किया है। सीवीसी ने ही यह मामला सीबीआई को जांच के लिए सौंपा है।
राजा के राष्ट्रीय राजधानी और तमिलनाडु के पेरांबुर स्थित आवास पर छापे मारे गए। इसके अलावा उनके कई संबंधियों और सहयोगियों के यहां भी तलाशी ली गई।
राजा और उसके सहयोगियों पर स्पेक्ट्रम आवंटन में कुछ दूरसंचार कंपनियों को बेजा लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने और आवेदन देने की अंतिम तिथि को पीछे खिसकाकर निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने, लाइसेंस लेने वाले से एक सप्ताह के भीतर शुल्क जमा करने तथा कुछ कंपनियों को लाइसेंस के मामले में लाभ पहुंचाने के इरादे से मनमाने आधार पर पहले-आओ पहले-पाओ के सिद्धांत को लागू करने का आरोप है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राजा से अक्टूबर 2007 से जनवरी 2008 के बीच स्पेक्ट्रम हासिल करने वाली कंपनियों के संगठनों में कथित तौर पर पूंजी लगाने के बारे में पूछताछ की गई है। सूत्रों के मुताबिक, राजा से कुछ सवाल पूछे गए और उन्हें उनके परिसर से जब्त कंप्यूटरों से प्राप्त दस्तावेज दिखाए गए।
इसके अलावा उनसे कंपनियों के लिए जनसंपर्क करने वाली नीरा राडिया के साथ बातचीत के बारे में भी सवाल पूछे गए। उनसे यह भी पूछा गया कि 2007 में स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में आवेदन देने की आखिरी तारीख पीछे क्यों खिसकाई गई। राजा ने 18 मई 2007 को दूरसंचार विभाग की जिम्मेदारी संभाली और 15वीं लोकसभा के लिए फिर से चुने जाने के बाद वह 31 मई 2009 से 14 नवंबर 2010 तक इस पद पर रहे।
उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय से 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच के बारे में 10 फरवरी तक स्थिति रिपोर्ट देने को कहा है। उस दिन मामले की अगली सुनवाई होनी है।
सीबीआई ने जांच के सिलसिले में भारती दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के पूर्व प्रमुख 1966 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी प्रदीप बैजल और दूरसंचार विभाग में पूर्व सचिव डीएस माथुर से भी पूछताछ की है।
टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में कुछ मुख्य घटनाक्रम-
17 अक्टूबर 2010: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने दूसरी पीढ़ी के मोबाइल फोन का लाइसेंस देने में दूरसंचार विभाग को कई नीतियों के उल्लंघन का दोषी पाया।
नवंबर 2010: दूरसंचार मंत्री ए राजा को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष ने संसद की कार्यवाही ठप्प की।
14 नवम्बर 2010: राजा ने इस्तीफा दिया।
24 और 25 दिसम्बर 2010: राजा से सीबीआई ने पूछताछ की।
31 जनवरी 2011: राजा से सीबीआई ने तीसरी बार फिर पूछताछ की। एक सदस्यीय पाटिल समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
2 फरवरी 2011: टू जी स्पेक्ट्रम मामले में राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आरके चंदोलिया को सीबीआई ने गिरफ्तार किया।
manojjaiswalobt@gmail.com
अर्धनग्न तस्वीर के लिए बिपाशा पर शिकायत दर्ज
प्रेशिका-बेबी सक्सेना-अर्धनग्न तस्वीर के लिए बिपाशा पर शिकायत दर्ज
समाज में अश्लीलता फैलाने के प्रयास का आरोप लगाते हुए एक वकील ने फिल्म अदाकारा बिपाशा बसु के खिलाफ भोपाल के मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी (सीजेएम) आर जी सिंह की अदालत में एक परिवाद पेश किया है।
सीजेएम की अदालत में दायर इस परिवाद में वकील निसार अहमद खान ने एक पत्रिका के मुखपष्ठ पर प्रकाशित बिपाशा के अर्धनग्न फोटो पर आपत्ति प्रकट करते हुए कहा है कि यह समाज में अश्लीलता फैलाने का प्रयास है, जिसके खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए। सिंह ने फरियादी का बयान दर्ज कराने के लिए पन्द्रह फरवरी की तिथि तय की है।
परिवाद में कहा गया है कि यह पत्रिका दुकानों पर खुले आम बिक रही है, जिसका समाज पर विपरीत असर पड़ेगा, इसलिए बिपाशा के खिलाफ भादंसं की धारा 292 सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए। इस मामले में फरियादी के बयान दर्ज होने के बाद ही तय होगा कि बिपाशा के खिलाफ प्रकरण बनता है अथवा नहीं।
babyjaiswal000@gmail.com
सीजेएम की अदालत में दायर इस परिवाद में वकील निसार अहमद खान ने एक पत्रिका के मुखपष्ठ पर प्रकाशित बिपाशा के अर्धनग्न फोटो पर आपत्ति प्रकट करते हुए कहा है कि यह समाज में अश्लीलता फैलाने का प्रयास है, जिसके खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए। सिंह ने फरियादी का बयान दर्ज कराने के लिए पन्द्रह फरवरी की तिथि तय की है।
परिवाद में कहा गया है कि यह पत्रिका दुकानों पर खुले आम बिक रही है, जिसका समाज पर विपरीत असर पड़ेगा, इसलिए बिपाशा के खिलाफ भादंसं की धारा 292 सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए। इस मामले में फरियादी के बयान दर्ज होने के बाद ही तय होगा कि बिपाशा के खिलाफ प्रकरण बनता है अथवा नहीं।
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ज़रा इधर भी एक नजर
इस खबर को पढ़ आप स्तब्ध हो सकते हैं. शर्म से सिर झुका सकते हैं. सोच में पड़ सकते हैं. अफसोस करने लग सकते हैं. मुस्करा कर हंस भी सकते हैं. चाहें जो करें, लेकिन खबर को इगनोर नहीं कर सकते. यह खबर देर तक आपके दिमाग में बैठी रहेगी. लेखक के पास इस खबर व तस्वीर को एक पाठक ने भेजा है.


भेजने वाले की मंशा यह बताने की थी कि देखो, कैसी कैसी खबरें छाप देते हैं अखबार वाले. लेकिन जब इस खबर को आप पढ़ते हैं तो पढ़ने-सोचने के कुछ देर बाद कई बड़े सवाल सामने आ जाते हैं. पहले तो अखबार में प्रकाशित खबर पढ़िए और फोटो देखिए, फिर आगे बढ़ते हैं...
खबर पढ़ने के बाद अब कुछ देर तक सोचिए.
फिर मेरे दिमाग में आए कुछ सवालों की लिस्ट को बांचिए-जांचिए, जो नीचे है, और तब अपने मन की बात बिलकुल नीचे कमेंट बाक्स में लिखकर बताइए...
- पढ़ने के बाद तो तुरंत यह लगता है कि इस नीच इंसान को बिना देरी किए फांसी पर लटका कर काम तमाम कर देना चाहिए.
- थोड़ा ठहरकर सोचने पर लगता है कि क्या ये इंसान समझदार नहीं है? अतिशय सेक्सुवल भावावेश में बजाय किसी लड़का-लड़की-महिला पर धावा बोलकर उसके साथ दुष्कर्म करने के, या किसी गरीब बच्चे-बच्ची महिला को फुसलाकर उसके साथ जबरदस्ती करने के, उसने दूसरा, कम अमानवीय, रास्ता अपनाया, जो उसे तुरंत सूझा और सामने दिखा होगा. उसने अमानवीय बनने की जगह, अजानवरीय बनना पसंद किया.
- मुर्गे, बकरे आदि को मारकर खा जाने वाले मनुष्य क्या इसी दोषी युवक की तरह दोषी नहीं हैं? उसने तो कुतिया से कुकर्म किया, हम लोग तो मुर्गे, कुत्ते, बकरे, कबूतर, सांप, बंदर, चूहे, झींगा, हिरन, भैंस... जो पका मिल जाए, खा लेंगे. जानवर का जान लेना जुर्म नहीं और जानवर से दुष्कर्म की इतनी बड़ी सजा की उस आदमी की तस्वीर तक छाप दी गई? उसे खलनायक बना दिया गया? पुलिस वाले टोपी लगाकर सक्रिय हो गए?? एलीट तबके के लोग कुतिया के हक के लिए जिंदाबाद-मुर्दाबाद के अंदाज में आगे आ गए?
- हम दिल्ली-मुंबई-लखनऊ-पटना सरीखे नगरों-महानगरों में रहने वाले भरे पेट-हरे नोट वाले बौद्धिक लोग क्या किसी चीज को सपाट तरीके से देखने के आदी नहीं हो गए हैं, जबकि हमारे आप पर दायित्व है कि ऐसी स्थितियों के अन्य पहलुओं पर भी बात करें, दूसरे पक्ष को भी सुनें, दूसरे पक्ष के हिसाब से भी सवाल पैदा करें. लेकिन सेक्स शब्द का उच्चारण करने से परहेज करने वाले हम हिंदी पट्टी के बौद्धिक हिप्पोक्रेट, सेक्स शब्द तक कहीं लिखा मिल जाता है तो सब छोड़कर उसे पढ़ने जानने के लिए टूट पड़ते हैं. इसलिए अखबार ने इस खबर को सपाट तरीके से ऐसे परोस दिया कि जो देखे वह पूरा पढ़े और आरोपी को फांसी देने वाली मानसिकता में आ जाए.
- जिस देश के ज्यादातर शहरों से हर साल गरीब बच्चियां हजारों की संख्या में अचानक गायब हो जाया करती हों, फिर उन्हें कोलकाता-मुंबई-दिल्ली सरीखे वेश्यावृत्ति के गढ़ों में बेच दिया जाता हो, उम्र से जल्दी सेक्स के लायक बनाने के लिए तरह-तरह के अप्राकृतिक उपाय किए जाते हों, हारमोन के इंजेक्शन लगाए जाते हों, उस देश की सरकार व बुद्धिजीवी इसे कोई मुद्दा बना पाने का, मुद्दा मान पाने का माद्दा नहीं रखते, लेकिन एक कुतिया से किसी नशेड़ी ने यौनाचार किया हो तो वह इतना बड़ा मुद्दा बन जाता है किसी अखबार के लिए.
मैं आरोपी का बचाव नहीं कर रहा. मैं उसे निर्दोष भी नहीं मान रहा. लेकिन खबर पढ़ने के बाद कुछ सवाल जो दिमाग में आ रहे थे, उसे रखने की कोशिश की है. संभव है, गलत सोच रहा हूं. हो सकता है एक पुरुष हूं, आक्रामक हूं, हर चीज में, तो उपरोक्त फोटो वाले पुरुष के अंदर के जानवर को महसूस कर पा रहा होऊं. हो सकता है सही वही हो जो खबर पढ़कर सीधे व सपाट तरीके से समझ में आ रहा हो कि इसे फांसी दे दी जाए क्योंकि इसने दुनिया का महा पापा किया है. लेकिन यह हक तो बनता है न कि किसी चीज के दूसरे पहलू के बारे में बात की जा सके, किसी चीज में विपक्ष के पक्ष को भी रखा जा सके. सोचिए, और कुछ समझाइए भी मुझे.
लेखक मनोज जैसवाल ईमेल manojjaiswal@gmail.com
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